संदेश

लाओ जी मेरे श्याम की पगड़ी

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               श्याम आए गोकुल में, धूम मची चारों ओर।                 बाबा   झूलाये  झुला,  मैया   खींचे   डोर। चले गोकुल के धाम, मथुरा के घनश्याम   झूमो नाचो गाओ आज, धन्य धन्य ये घड़ी।  पालना है चन्दन का,श्रृंगार हीरे मोती का हो लेके माखन मिश्री , जोगन द्वार खड़ी। लाओ जी मेरे श्याम की, जिसपे जड़ें हैं मोती छोटी सी मोरपंख की, लाल पीली पगड़ी। मैं तो वारी-वारी जाऊँ, बलि हारी-हारी ‌‌जाऊँ गिरधारी की नजर, उतारूँ घड़ी-घड़ी।।(1) जरा मटक-मटक, चले ठुमक-ठुमक सुन पैंजनी की धुन, कलियाँ भी चटकी। यमुना के तट पर, बाँसुरी की धुन पर सुध-बुध खोए सब, गोपियाँ भी भटकी। ग्वालबाल टोली संग, ग्वालिन को करें तंग छुप-छुप आके खाए,  माखन की मटकी। आगे-आगे हैं कन्हैया, पीछे-पीछे चले गैया अद्भुत छटा देखके, साँझ बेला अटकी।।(2)

नागपंचमी

श्रावण की शुक्ल पक्ष पंचमी  "नाग पंचमी" दीप-धूप, चंदन, रोली  और पूजा की थाली पानी और चढ़ावे दूध और श्रद्धा के फूल, खिली-खिली धूप नवेली अभी-अभी है जागी, नागदेव के पूजन को आई भक्तों की टोली, प्रकृति और भक्तों का मनमोहक ये रूप, नागदेव के दर्शन पाकर जीवन हुआ संपूर्ण।

चलो देश को राम बना लें

चलो देश को राम बना लें अपना-अपना भगवान बना लें राष्ट्रहित है पूजा हमारी हम तारे सूरज हिन्दूसतान बना लें चलो देश को राम बना लें अपना-अपना भगवान बना लें।। शहीदों की ये कुर्बानी शूरवीरों की है निशानी आजादी के दीवानों का सपनों सा हिंदुस्तान बना लें चलो देश को राम बना लें अपना-अपना भगवान बना रहे।। हर धर्म-जाति से पहले हम एक आंगन के बच्चे चलो वर्दी वालों के जैसे तिरंगे को पहचान बना लें  चलो देश को राम बना लें अपना-अपना भगवान बना लें।। रक्त नहीं संकल्प चाहिए हिफाजत की सौगंध चाहिए वीरों के पथपर चलकर  विजय-हिन्द का अभियान बना लें चलो देश को राम बना लें अपना-अपना भगवान बना लें।।

सावन

सावन आए बरखा लाए, सबके मन को खूब लुभाए। रिमझिम-रिमझिम बरसे पानी खूब नहाई चिड़िया रानी, घर आँगन भी खूब भीगाए। सबके मन को खूब लुभाए। बारिश की बूँदों ने पत्तों से मिलके, गीत सुहाने खूब सुनाए। सबके मन को खूब लुभाए। कोयल की कुहु-कुहु पपीहा की पीहू-पीहू, नाचे मोर पंख फैलाए। सबके मन को खूब लुभाए। भीग गई है धरती सारी छाई चारों ओर हरियाली देखो इन्द्रधनुष भी आए। सबके मन को खूब लुभाए। खेल रहे हैं बच्चे सारे बादल काका ताना मारे  बिजली हमको बहुत डराए। सबके मन को खुब लुभाए।

हरियाली तीज

सावन में होके मगन चली रे! सखी, झूला झूलन चली रे! रिमझिम सावन में हरियाली तीज पूजन चली रे सखी, झूला झूलन चली रे! मेहंदी वाली हाथों में हरी-हरी चुड़ियां पहन चली रे सखी, झूला झूलन चली रे! हरी-हरी साड़ी में करके सोला श्रृंगार दुल्हन बनी रे सखी, झूला झूलन चली रे!

जिन्दगी बेमिसाल है

ज़िन्दगी लम्बी नहीं, बड़ी होनी चाहिए। दार्शनिक होना ठीक है पर हर बार कुआँ खोदना फिर उसी में गिरजाना कहाँ कि अकलमंदी है । ज़िन्दगी है बेबाक है, बेखुदी है, बेकुफी है पर है  तो अपनी  हाँ  बिलकुल बेजोड़ है। जीवन में जो भी आयें खुशी हो या गम अपने-पराये प्रतिद्वंद्वी हो या मित्र उन्हें जीएं, महसूस करें  उनका भरपूर आनंद उठायें क्यों कि ये सब... कुछ समय के लिए हैं चुनौतीपूर्ण हैं  हमें जूझने के लिए मजबूर करते हैं। कुछ तो इतना थका भी देते हैं  लगता है कि.. अब इसके आगे कुछ भी नहीं है। पर हमेशा याद रखें जो इस पल में है वो अगले पल में बदल जायेगा जो आयेगा वो एक नई शुरुआत होगी एक नई बात होगी एक नई कहानी के साथ नए अहसास होंगे ज़िन्दगी लम्बी नहींं बड़ी होनी चाहिए।

समय

तू निराश न हो हौसला रख ये जो वक्त है इसे बीत जाने का हुनर आता है। बस तु अपने कदम छोटे कर ले जरा धीरे धीरे चल छाई है जो काली बदरा इसे छट जाने दे सूरज की किरणों को भला कोई रोक पाया है ये जो वक्त है इसे बीत जाने का हुनर आता है।