संदेश

मदारी

एक मदारी, बड़ा खिलाड़ी डुगडुगी बजाके खेल दिखाए उसके इशारे पे नाची बंदरिया तमाशा देखे सारी नगरिया। बातों का जादूगर सपनों का सौदागर अपनी धुन पर नाच नचाए अपने सूर वो आप सुनाए हुआ अंधेरा उठाकर झोला दिनभर का खिलाड़ी  घर लौटा थका मदारी।।

एक शिकारी बड़ा सयाना!

एक शिकारी बड़ा सयाना डाले भ्रम का दाना, जाल ऐसा डाला फस गया जंगल सारा, मची हुई है भगदड़ हो रहा है दंगल, हो गया है व्यापार बड़ा डर का कारोबार खड़ा फायदे की है साझेदारी  करे यहाँ सभी होशियारी, क्या कबूतर क्या शिकारी बचने की है पूरी तैयारी,  भूला दी है दुनियादारी सबको अपनी जान है प्यारी, ढुंढ रहे हैं सभी अनाड़ी यहाँ सभी हैं खिलाड़ी, विभिन्न-विभिन्न जाल बदले भाँति-भाँति की चाल चले, मनसुबों का नहीं ठिकाना ये शिकारी बड़ा सयाना।।

अन्नदाता

ऐसा भी एक दिन था, जब देश के खातिर भुखे ने भी उपवास रखा, देश के पहले नागरिक ने अपने आँगन में हल चलाया, तब लेकर हरित क्रांति की मिसाल किसान ने धरती से सोना उगाया, देश को अन्न का भंडार दिया, भूख से नाता तोड़ दिया, ये किसान है  माटी का लाल है दो धारी तलवार है कर ना साजिशें नीति बीच की। सत्य है  शाश्वत है ये वार पे वार सब बेकार है। देश का स्तंभ, इसे मौसमों से ना डरा, वसंत, ग्रीष्म, वर्षा, शरद, हेमंत और शिशिर, दिन-रात, खेत-खलयान, खुला आसमान, सब हैं इसके सखा। हर गीत में, प्रीत में बसी है इसकी कथा। ये है  मेरा ''अन्नदाता'' "अन्नदाता सुखी भव" "अन्नदाता सुखी भव"               "अन्नदाता सुखी भव" 8/12/20 "किसान आंदोलन "

दीप

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एक दीप रोशनी से भरा, दसों दिशाँ प्रकाशित करे। हर्ष और उल्लास से, नव जीवन प्रतिष्ठित करे। एक दीप उमंग से भरा, भक्ति में रंगा जो अंतर्मन तलक, निर्भय और जागृति करे। अंधकार में, आशा की किरणें उम्मीद और विश्वास की, शक्ति सदा प्रज्वलित करे। समय के  चक्र में, घटित घटनाओं में मानव के हृदय को, संताप में आनंदित करे। मेरा कोटी कोटी नमन उस दीप को उस वीर को जो जन कल्याण में अपना सर्व जीवन समर्पित करे। एक दीप रोशनी से भरा, दसों दिशाँ प्रकाशित करे। हर्ष और उल्लास से, नव जीवन प्रतिष्ठित करे।

हे ज्योतिमय संत

हे प्रकाश के स्वामी, हे ज्योतिमय संत। करूँ तुम्हारी वंदन, हे निर्मल, पतंग अंधकार में भटकता, घट-घट तुमको ढूंढता, ये बैरागी मन। अज्ञानता भरी छाया, शूल से घायल काया, नश्वर अंतर्मन। अब प्रभात पट खोलो, अंध-उर प्रकाश भर दो, हे प्रभु दयावंत। हे प्रकाश के स्वामी, हे ज्योतिमय संत। करूँ तुम्हारी वंदन, हे निर्मल पतंग।

जीवन के दिन चार

जीवन के दिन चार रे भैया जीवन के दिन चार। प्रभु नाम की माला जपना; प्रभु नाम की माला जपना कट जायें दिन चार रे भैया! जीवन के दिन चार। दो दिन दुख के दो दिन सुख के; दो दिन दुख के दो दिन सुख के बीत गये दिन चार रे भैया! जीवन के दिन चार। एक सहारा प्रभु का द्वारा; एक सहारा प्रभु का द्वारा बाकी सब बेकार रे भैया जीवन के दिन चार।।

बापू की एक मुस्कान!

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युद्ध के मैदान हजारों लाखों हैं सैनिक हथियारों का है जखेड़ा नीतियाँ है, देश-विदेशी हजारों साल पुरानी योद्धा हो या महारथी हुआ सब निराधार बेअसर, बेकार शान्त हुई ज्वाला स्थिर हुआ तूफ़ान बापू की एक मुस्कान।। पूछो माँ भारती से मेरे शब्दों में कहाँ इतनी ताकत मैं करूँ बस बापू की इबादत जहाँ हुआ असम्भव बापू हैं वहाँ सम्भव विश्व में, हर जगह शान्ती का एक नाम बापू की एक मुस्कान।। छोड़ आये जिन्हें, पन्नों में भूल गये जिन्हें, बातों में धर्मों के ऊपर एक धर्म, धामों में हैं, एक धाम सत्य, अहिंसा, और प्रेम का नहीं कोई दूसरा परिधान बापू की एक मुस्कान।। समाज की संजीवनी समझ सको तो समझो जान सको तो जान एक सुत्र में बाँधना एकता की ताकत सत्य की एक पहचान भारत की एक शान बापू की एक मुस्कान।।